Tuesday, December 13, 2011

या खुदा! बस उनको अदा बख्श दे|

बेवफाओं के  शहर को  वफा  बख्श दे|
तू वहां भी मुहब्बत की फिजा बख्श दे|
रहम आ जाए देख के मासूमियत को,
वो इसी बायस ही मेरी कहता बख्श दे |
शक्ल -सूरत से तो भले है ही वो मगर ,
या खुदा! बस  उनको  अदा बख्श  दे|
जल रहें है हम इसी मंशा में ,शायद हमें ,
इस फिजा में कोई ठंडी हवा बख्श दे |
हर तरफ से आये हैं गरम हवा के झोंके ,
हो इनायत वो ज़ुल्फ़ की घटा बख्श दे |
अफ़साने लिख देगा "नजील"मुहब्बत के,
गर उसे लिखने का हुनर  खुदा बख्श दे |

4 comments:

  1. आपकी पोस्ट आज के चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    चर्चा मंच-729:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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  2. अफ़साने लिख देगा "नजील"मुहब्बत के,
    गर उसे लिखने का हुनर खुदा बख्श दे |
    wah kya baat hai aek aek sher badut baiyaa hai .bahut badhaai aapko.

    आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली (२२) में शामिल की गई है /कृपया आप वहां आइये .और अपने विचारों से हमें अवगत करिए /आपका सहयोग हमेशा इसी तरह हमको मिलता रहे यही कामना है /लिंक है

    http://hbfint.blogspot.com/2011/12/22-ramayana.html

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  3. धन्यवाद प्रेरणा जी ... आपका तहे-दिल से आभार .

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