Thursday, May 7, 2015

आसमां से वो परी उतरी नहीं तो क्या हुआ

चाल सितारों की अभी सीधी नहीं तो क्या हुआ ||
अबके किस्मत आपकी चमकी नहीं तो क्या हुआ ||

फसल उगा दी उल्फतों की इस सीने के खेत में ,
गर हमारे पास ये धरती नहीं तो क्या हुआ ||

जो  हुआ  दीदार  उनका  दूर  से  तो खुश  हुए ,
पास से नज़रें कभी मिलती नहीं तो क्या हुआ |

.
चाहते  हैं  जान  से  बढ़कर  हमें माँ -बाप भी ,
ये अलग है ,जो चली मरजी नहीं तो क्या हुआ ||

ओट कर देंगे किताबों की ,सनम बरसात में ,
आज अपने पास गर छतरी नहीं तो क्या हुआ ||

खाब  में  है वो ,ख्यालों  में  वही  है  सांवली ,
आसमां से वो परी उतरी नहीं तो क्या  हुआ ||

दिल डरा था दोस्तों के साथ महफ़िल में बड़ा ,
वालिदा अगर हमसे झगड़ी नहीं तो क्या हुआ ||

भीगतें तो हैं "नज़ील"हम बारिशों की रुत में ,
बूँद उल्फत की कभी गिरती नहीं तो क्या हुआ |

Monday, April 20, 2015

मुहब्बत के शहर की तलाश है |

मुहब्बत से देखे हमें उस नज़र की तलाशहै |
बीत जाए ज़िन्दगी बस हमसफ़र की तलाश है ||

हैं मकां तो लाखों-हजारों जहाँ में ,मगर हमें,
हो रिश्तों की बुनियाद पे एक घर की तलाश है |

बस जिंदा हैं जिस्म ,अरसा हुआ रूह को मरे हुए
ले जाए जो हमको खुदा तक ,उसी सफ़र की तलाश है |

खो गए  हैं जो गीत मिलते नहीं अब कही हमें ,
पेड़ पर पंछी फिर गाएं,उस सहर की तलाश है |

कौन जाने आई कहाँ से ,बसे है कहाँ ,तभी,
हर किसी को इस मुहब्बत के शहर की तलाश है |

आस्तां  पे  बैठे  क्यों  है  भला  इन्तज़ार  में ,
जब पता है ,उनको किसी और दर की तलाश है |

बहुत जागे हैं रात -दिन मुहब्बत में "नज़ील" हम ,
अब  हमें  सोने  के  लिए  इक  कब्र  की तलाश है

Thursday, April 9, 2015

अल्लाह जो लिखे किस्मत की किताब में |

अल्लाह जो लिखे किस्मत की किताब में |
कोई  कमी  न  रहे  कभी  उस  हिसाब में ||

माना कि बहुत दिलकश अदा है जनाब में |
मालूम है  उसे  हम  भी  हैं  शबाब  में

ख़त  है  लिखा  उसे   इजहारे-इश्क  में पर ,
मै  जानता  हूँ  जो  वो  लिखेंगे जवाब  में||

उनसे  जुदा  हुआ , जिंदगी ही बिखर गई ,
बस   ढूंढता  रहा   उनको   मै  शराब  में ||

पाया   क्या  ,क्या   खोया  है   इश्क   में.
उलझा  रहूँ  इसी  अनसुलझे  हिसाब  में |

उसने  दिया  कभी  नजराना -ए- उंस मुझे,
है आज भी महक उस सूखे गुलाब में ||

वादा  करो  अगर  मुझसे  तो "नजील"मैं,
सोया   रहूँ  उम्र  भर  तेरे  ख्वाब  में

Wednesday, April 8, 2015

बहुत कुछ दांव पे लगाया है ॥

बड़ा मुश्किल उसे मनाया है ॥ 
बहुत कुछ दांव पे लगाया है ॥ 


किसे कहते कि बेवफा है वो ,
हँसा हम पे जिसे बताया है ॥ 


बसा दिल-ओ-दिमाग में वो ही ,
अचानक सामने जो आया है ॥ 


लगे ऐसा हमें खुदा ने उसे ,
हमारे के लिए बनाया है ॥ 


हुआ है एहसास जन्नत का , 
जो माँ ने गोद में सुलाया है ॥ 


कहाँ होशो-हवास की बातें ,
किसी पे जब शबाब आया है ॥ 


लगे है वो पवित्र गंगा सा ,
करिंदा जो पसीने से नहाया है ॥

Thursday, April 2, 2015

वो सताए है मुझे यादों में शामो - सहर

जिंदगी मेरी कहाँ जाके गई है तू ठहर ॥
ले गई है फिर वहां ,जो छोड़ आया था  शहर

है खुदा भी एक ,एक ही आसमां , एक ही  ज़मीं
सरहदों पर किस लिए हमने मचाया है  कहर 

मारता आया है बरसों  बाद भी अक्सर  हमें ॥
घुल गया था जो दिलों  में  लकीरो  का जहर

भूल कर भी भूल सकता हूँ भला कैसे  उसे  ,
वो सताए है मुझे यादों में शामो - सहर

वायदा करके नहीं आये अभी तक क्यों  भला ,
यूँ अकेला बैठ कर कब तक  गिनूँगा मैं  पहर ।

सूखी थी दिल की ज़मीं ,आबाद जो  फिर से हुई ,
यूँ लगे है छू गई  इसको  मुहब्बत  की  लहर ॥

Sunday, March 29, 2015

वो वायदे गिनने लगे हैं आज कल

खामोश से रहने लगे हैं आजकल ॥
हम रात भर जगने लगे हैं आजकल ॥
इन महफ़िलों को क्या हुआ किसको पता ,
सब  चेहरे ढलने लगे है आजकल ॥
सदियों से लूटा है खुदा के नाम पे ,
तो कब नया ठगने लगे है आज कल ॥
निभते नहीं हैं जो सियासत में कभी ,
वो वायदे गिनने लगे हैं आज कल ॥
कैसे कहें , कितना चाहें हैं उसे ,
बस सोच के डरने लगे हैं आज कल ॥
मालूम होता तो बता पाते तुझे ,
वो दूर क्यों हटने लगे हैं आज कल ॥
अब क्या कहें तुमको कि तेरे ही सबब ,
हम पे सवाल उठने लगे है आज कल ॥

Monday, March 16, 2015

माना होता खुदा को एक हमने

लोगों को लूटने का फ़लसफ़ा होता ||
तो अपने नाम पर बाबा लगा होता ||
तूं तूं - मैं मैं न होती इस कदर हम में ,
तेरा मेरा अगर इक रास्ता होता ||
माना होता खुदा को एक हमने तो ,
फिर घर न कोई किसी का जला होता ||
उनको आया नज़र फर्के- लिबासां ही ,
काश !ये इक रंग का खूं भी दिखा होता ||
फिर मैं भी मानता परवाह है उसको ,
ग़र आंसू पोंछ बांहो में कसा होता ||
समझौता कर लिया हालात से उसने ,
हो जाती जीत ग़र ज़िद पे अड़ा होता||
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