Tuesday, February 7, 2012

डूबा यादों का सफीना

डूबा यादों का सफीना माजी के बहर में ||
न मिला उसको ढूंढना चाहा हर इक लहर में ||
 

बोला न कोई मुहब्बत से ,हम से दोस्तों ,
हम अजनबी हुए हैं अपने ही शहर में ||
 

गर दे हैं वो ज़हर भी हमको अपने हाथ से ,
लगती है अज़ब  मिठास हमको उनके ज़हर में ||
 

खण्डहर हुए अरमान मेरे साथ वक्त के तो क्या ,
है इक रशिमे-नूर अरमानों के खण्डहर में ||
 

वो पूछें हैं हाल ,मगर बताएं कैसे उसे ,
कैसे महफूज़ रह सकते हैं ऐसे कहर में ||

3 comments:

  1. बहूत हि सुंदर गजब के भाव है ..
    हमारे ब्लॉग पर भी आपका
    स्वागत है
    mauryareena.blogspot.com

    ReplyDelete
  2. आपकी पोस्ट चर्चा मंच पर प्रस्तुत की गई है
    कृपया पधारें
    http://charchamanch.blogspot.com
    चर्चा मंच-784:चर्चाकार-दिलबाग विर्क

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